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बीज और अनाज में कà¥à¤¯à¤¾ अंतर होता है à¤à¤µà¤‚ बीज के पà¥à¤°à¤•ार लिखिà¤
बीज कà¥à¤¯à¤¾ है what is seed in hindi
( क ) पौधे का à¤à¤• à¤à¤¾à¤— ( A part of plant ) :- वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ में बीज का तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ à¤à¤• परिपकà¥à¤µ बीजाणà¥à¤¡ ( Ripened ovule ) से लगाया जाता है, जिसमें उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ à¤à¥à¤°à¥‚ण ( Embryo ), à¤à¥à¤°à¥‚णपोष ( Endosperm ) अथवा बीजपतà¥à¤°à¥‹à¤‚ ( Cotyledons ) में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ को लेकर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤à¤¿à¤• वृदà¥à¤§à¤¿ करता है और नठपौधों को जनà¥à¤® देता है।
लेकिन बहà¥à¤¤ सी फसलों के बीज केवल परिपकà¥à¤µ बीजाणà¥à¤¡ नहीं होते, उनमें कà¥à¤› अनà¥à¤¯ पादप अंग à¤à¥€ जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ रहते हैं। जैसे - गेहूं, धान, मकà¥à¤•ा, सूरजमà¥à¤–ी आदि। ये बीज वानसà¥à¤ªà¤¤à¤¿à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से बीज न होकर à¤à¤•बीजी फल है, जिनमें बीजावरण तथा फलà¤à¤¿à¤¤à¥à¤¤à¤¿ ( pericarp ) परसà¥à¤ªà¤° आपस में जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ रहते हैं।
बीज कà¥à¤¯à¤¾ है, बीज और अनाज में अंतर, बीज के पà¥à¤°à¤•ार, what is seed , definition of seed
बीज और अनाज में कà¥à¤¯à¤¾ अंतर होता है à¤à¤µà¤‚ बीज के पà¥à¤°à¤•ार लिखिà¤
( ख ) पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤§à¤¨ सामगà¥à¤°à¥€ ( sowing material ) :- कà¥à¤› पौधों में अगली फसल का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ बीज के अलावा पौधों के अनà¥à¤¯ वानसà¥à¤ªà¤¤à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤—ों जड, तना व पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ आदि से à¤à¥€ किया जाता है। जैसे - पौद, कंद, शकà¥à¤² कंद, पà¥à¤°à¤•ंद, जड़े, कलमें व अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤§à¤¨ सामगà¥à¤°à¥€ ( sowing material )।
अतः बीज पà¥à¤°à¥Œà¤¦à¥à¤¯à¥‹à¤—िकी में बीज का तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ लैंगिक जनन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ ( sexually reproduction ) बीज के साथ-साथ फल, तना, जड व अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤§à¤¨ सामगà¥à¤°à¥€ ( propagating material ) से है। बीज अधिनियम, 1966 में बीज को इसी पà¥à¤°à¤•ार परिà¤à¤¾à¤·à¤¿à¤¤ किया गया है।
इस पà¥à¤°à¤•ार बीज à¤à¤• छोटी जीवित रचना है, जिसमें à¤à¥à¤°à¥‚णीय पौधा ( embryonic plant ) ऊतकों ( tissues ) की विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ परतों से ढका हà¥à¤† सà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤¤ ( dormant ) अवसà¥à¤¥à¤¾ में रहता है, जो अनà¥à¤•ूल वातावरणीय परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ - नमी, ताप, वायॠव पà¥à¤°à¤•ाश की सà¥à¤²à¤à¤¤à¤¾ और मृदा के संपरà¥à¤• से नठपौधे में विकसित हो जाता है। वसà¥à¤¤à¥à¤¤à¤ƒ बीज à¤à¤• सूकà¥à¤·à¥à¤® पौधा ही है।
बीज और अनाज में अंतर difference between Seed and grain
अनाज और बीज दोनों के उपयोग कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° अलग - अलग हो जाते हैं। इसलिठदोनों के बीच अंतर बन जाते हैं। अनाज और बीज में बीच अंतर
• वरà¥à¤£à¤¨ ( description ) - बीज में लैंगिक जनन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ बीज के साथ-साथ पौधों के à¤à¤¾à¤— जैसे - तना, पतà¥à¤¤à¥€, जड़ à¤à¥€ समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ होते हैं, जबकि दाने ( अनाज ) केवल खादà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥à¤¨à¥‹à¤‚ ( cereals and millets ) के लैंगिक जनन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ बीज ही होते हैं।
• उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ ( production ) - अनाज के लिठउगाई जाने वाली फसलों से अधिक उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करना ही पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¥à¤¯ होता है अतः इसका बीज के गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से कोई संबंध नहीं होता है। जबकि बीज उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के लिठकिसी सà¥à¤µà¥€à¤•ृत या मानà¥à¤¯ सà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ से आधार या पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤• बीज पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया जाता है और बीज फसल को उगाने और कटाई के बाद संसाधन व à¤à¤‚डारण आदि कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं के दौरान पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण के सà¤à¥€ संà¤à¤µ सà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ और कारकों को यथासंà¤à¤µ दूर रखने का पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ किया जाता है। उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ बीजों का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥€à¤•रण किया जाता है à¤à¤µà¤‚ उन पर लेबिल लगाठजाते हैं।
• गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ ( quality ) - अनाज के लिठउसकी à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ अनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिक शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾, अंकà¥à¤°à¤£ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤, कीट कà¥à¤·à¤¤à¤¿ आदि के विषय में कोई धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं दिया जाता है, इसमें तो केवल पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ही सबसे उतà¥à¤¤à¤® माना जाता है। जबकि बीज सबसे अचà¥à¤›à¤¾ वही माना जाता है, जिसकी अनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिक शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ शत-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ हो, अंकà¥à¤°à¤£ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ अचà¥à¤›à¥€ हो, तथा उसकी à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥€ हो। कीड़ों और रोगों से मà¥à¤•à¥à¤¤ हो तथा उसमें जीवन शकà¥à¤¤à¤¿ व ओज à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में हो।
• उपचार ( treatment ) - बीज का उपयोग बोने के लिठकिया जाता है, खाने के लिठनहीं। अतः उसे à¤à¤¸à¥‡ विषाकà¥à¤¤ रसायनों से उपचारित किया जाता है, जो बीज को नषà¥à¤Ÿ करने वाले कीड़ों, बीमारियों तथा जीव - जंतà¥à¤“ं से बीज को बचाते हैं। जबकि अनाज का उपयोग खाने के लिठकिया जाता है।
इसलिठउसको सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने के लिठà¤à¤¸à¥‡ रसायनों का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जाता है, जो कीड़ों और रोगों से तो बीज को बचा सके लेकिन मनà¥à¤·à¥à¤¯ पर इनका कोई पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ न पड़े। अतः बीज का उपयोग अनाज के रूप में नहीं किया जा सकता है, जबकि अनाज का उपयोग बीज के लिठकिया जा सकता है।
बीज के पà¥à¤°à¤•ार हिनà¥à¤¦à¥€ में types of seeds in hindi
बीजों को कई पà¥à¤°à¤•ार से वरà¥à¤—ीकृत किया जा सकता है :-
( क ) जनन विधि के आधार पर बीजों का वरà¥à¤—ीकरण ( method of reproduction )
पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ की विधियों के आधार पर बीजों के दो पà¥à¤°à¤•ार होते हैं -
• लैंगिक जनन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ बीज ( sexually reproduced seeds ) - इस शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में बीज की सामानà¥à¤¯ परिà¤à¤¾à¤·à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° परिà¤à¤¾à¤·à¤¿à¤¤ बीज ही आते हैं, जो निषेचन के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ à¤à¥à¤°à¥‚ण के विकास से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होते हैं।
• अलैंगिक जनन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ बीज ( asexually reproduced seeds ) - कà¤à¥€-कà¤à¥€ अगली फसल उगाने के लिठबीज के अलावा अनà¥à¤¯ पादप सामगà¥à¤°à¥€ ( वानसà¥à¤ªà¤¤à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤— ) जड़, तना, पतà¥à¤¤à¥€ आदि पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में लाई जाती है, तो वह बीज ही कहलाती है जैसे -
( i ) à¤à¥‚मिगत तने ( underground stems )
पà¥à¤°à¤•ंद ( rhizome ) - अदरक, हलà¥à¤¦à¥€, केली आदि।
कंद ( Tuber ) - आलू
घनकंद ( corm ) - अरवी, जिमीकंद आदि।
शलà¥à¤• कंद ( bulb ) - पà¥à¤¯à¤¾à¤œ, लहसà¥à¤¨ आती।
( ii ) अधà¥à¤°à¥à¤¦à¤µà¤¾à¤¯à¤µà¥€à¤¯ तने ( sub - aerial stems )
उपरिà¤à¥‚सà¥à¤¤à¤¾à¤°à¥€ - दूब, घास, बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¥€ बूटी आदि।
अनà¥à¤¤:à¤à¥‚सà¥à¤¤à¤¾à¤°à¥€ - पोदीना, गà¥à¤²à¤¦à¤¾à¤µà¤¦à¥€ आदि।
à¤à¥‚सà¥à¤¤à¤¾à¤°à¤¿à¤•ा - जलकà¥à¤‚à¤à¥€, सिंघाड़ा आदि
à¤à¥‚सà¥à¤¤à¤¾à¤°à¥€ - सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¬à¥‡à¤°à¥€
( iii ) पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ ( leaves )
दरà¥à¤¦à¤®à¤¾à¤°
बिगोनिया आदि।
( iv ) पतà¥à¤° पà¥à¤°à¤•लिका ( bulbils )
लहसà¥à¤¨, रतालू आदि।
( v ) असंग जनित बीज
आम, तमà¥à¤¬à¤¾à¤•ू आदि।
( vi ) कृतà¥à¤°à¤¿à¤® पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤§à¤¨ ( artificial propagation )
जड़ कलमें ( root cutting ) - नींबू, संतरा आदि।
तना कलमें ( stem cutting ) - गनà¥à¤¨à¤¾ , शकरकंद आदि।
चशà¥à¤®à¤¾ चढाना ( budding ) - गà¥à¤²à¤¾à¤¬
कलम बंधन ( grafting ) - आम, लीची आदि।
दाब लगाना ( layering ) - नींबू, अंगूर, गà¥à¤²à¤¾à¤¬ आदि।
गूटी ( gootee ) - रबड, नींबू आदि।
( ख ) बीजों के आयà¥à¤•ाल के आधार पर ( longevity of seeds )
कà¥à¤› बीजों को यदि हम कटाई के तà¥à¤°à¤‚त बाद बोते हैं तो उनमें अंकà¥à¤°à¤£ हो जाता है,‌ लेकिन कà¥à¤› जातियों के बीच उचित नमी, ताप व वायॠके मिलने पर à¤à¥€ परिपकà¥à¤µà¤¤à¤¾ के तà¥à¤°à¤‚त बाद नहीं उगते। à¤à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤ªà¥à¤¤à¤¿ ( dormancy ) के कारण होता है। à¤à¤¸à¥‡ बीजों में कà¥à¤› समय के लिठविशà¥à¤°à¤¾à¤® काल ( rest period ) रहता है, ‌ लेकिन कà¥à¤› बीज तो बरसों जमीन में पड़ने के बाद à¤à¥€ जीवनकà¥à¤·à¤® ( viable ) बने रहते हैं।
• अलà¥à¤ªà¤¾à¤¯à¥à¤œà¥€à¤µà¥€ बीज ( microbiotic seeds ) - इस वरà¥à¤— के अंतरà¥à¤—त वे बीज आते हैं जिनकी आयॠलगà¤à¤— 3 वरà¥à¤· तक होती है, उदाहरण के लिठमालवेसी व लेगà¥à¤¯à¥à¤®à¤¿à¤¨à¥‡à¤¸à¥€ कà¥à¤² के पौधों के बीज।
• मधà¥à¤¯à¤® आयà¥à¤œà¥€à¤µà¥€ बीज ( mesobiotic seeds ) - इस वरà¥à¤— के अंतरà¥à¤—त वे बीज आते हैं जिनकी आयॠलगà¤à¤— 3 से 15 वरà¥à¤· तक होती है, अधिकतर वे बीज इसी शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में आते हैं।
• दीरà¥à¤˜à¤¾à¤¯à¥à¤œà¥€à¤µà¥€ बीज ( macrobiotic seeds ) - इस वरà¥à¤— के अंतरà¥à¤—त वे बीज आते हैं जिनकी आयॠलगà¤à¤— 15 से 100 वरà¥à¤· तक होती है और कà¤à¥€-कà¤à¥€ इससे à¤à¥€ अधिक होती है।
( ग ) à¤à¤‚डारण कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ ( storability ) के आधार पर बीजों का वरà¥à¤—ीकरण
उचित परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में अनेक जातियों के बीजों का 50 से 100 वरà¥à¤· तक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ à¤à¤‚डारण आसानी से किया जा सकता है।
राॅबरà¥à¤Ÿà¤¸ ( Roberts ), 1973 ने बीजों को उनकी à¤à¤‚डारण कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ के आधार पर दो समूहों ( सरल व अडियल बीज ) में बांटा है।
• सरल बीज ( orthodox seeds ) - इस वरà¥à¤— के बीजों में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ नमी अंश को उनकी जीवन कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ में कमी किठबिना 5% अथवा इससे à¤à¥€ कम किया जा सकता है, साथ ही ये बीज अवशीतन ( freezing ) à¤à¥€ सहन कर सकते हैं। जिससे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आसानी से लंबे समय तक à¤à¤‚डारित किया जा सकता है। अधिकतर फसल वाले पौधे इस वरà¥à¤— में आते हैं।
( i ) सतà¥à¤¯ सरल बीज ( true orthodox seeds ) - ये बीज अवशीतन तापमान पर लंबे समय तक à¤à¤‚डारित किये जा सकते हैं। अनेक फल वृकà¥à¤·à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ वन वृकà¥à¤·à¥‹à¤‚ के बीज इस वरà¥à¤— के अंतरà¥à¤—त आते हैं, जैसे - जंगली अखरोट, चीड़, चैरी à¤à¤µà¤‚ अलूचा आदि।
( ii ) उप - सरल बीज ( sub - orthodox seeds ) - ये बीज à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ दशाओं में à¤à¤‚डारित किठजा सकते हैं, जिनमें सतà¥à¤¯ सरल बीज का à¤à¤‚डारण किया जाता है, लेकिन अपेकà¥à¤·à¤¾à¤•ृत थोड़ी अवधि के लिà¤à¥¤ इसका कारण इन बीजों में पाया जाने वाला अधिक वसा ततà¥à¤µ ( अखरोट व कà¥à¤› चीड़ वृकà¥à¤· ) à¤à¤µà¤‚ फलà¤à¤¿à¤¤à¥à¤¤à¤¿ व बीज चोल का पतला होना ( चिनार, सरपत ) हो सकता है।
• मधà¥à¤¯à¤µà¤°à¥à¤¤à¥€ बीज ( intermediate seeds ) - ये बीज à¤à¥€ सरल बीज वाली दशाओं तक सà¥à¤–ाये जा सकते हैं ( 12-15% नमी सà¥à¤¤à¤° ‌), लेकिन निमà¥à¤¨ तापमान के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ संवेदनशील होते हैं। जीवन कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कà¥à¤› वरà¥à¤· तक ही रहती है। इस वरà¥à¤— में कहवा के बीज आते हैं।
• अडियल बीज ( recalcitrant seeds ) - इस वरà¥à¤— के बीजों में नमी सà¥à¤¤à¤° 12-13 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से नीचे लाने पर उनकी जीवन कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ में बड़ी तेजी से कमी आती है और ये अवशीतन à¤à¥€ सहन नहीं कर सकते हैं, जिससे इनके à¤à¤‚डारण में काफी कठिनाई आती है और ये बीज अलà¥à¤ªà¤¾à¤¯à¥ होते हैं। इन बीजों के उदाहरण के लिठअनेक वन वृकà¥à¤· व फल वृकà¥à¤· के बीज जैसे - कोको, कहवा, नींबू, आम, कटहल आदि हैं।
( i ) शीतोषà¥à¤£ अड़ियल बीज ( temperate recalcitrant seeds ) - इन बीजों को सà¥à¤–ाया नहीं जा सकता है, लेकिन इन बीजों को अवशीतन या उससे निमà¥à¤¨ तापमान पर à¤à¤‚डारित कर सकते हैं। इसके उदाहरण के लिठअखरोट व सिंदूर के बीज हैं।
( ii ) उषà¥à¤£ अड़ियल बीज ( tropical recalcitrant seeds ) - इन बीजों को 10-15° से. से नीचे तापमान पर बहà¥à¤¤ थोड़े समय रखने पर ही इनकी जीवन कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ समापà¥à¤¤ हो जाती है। इन बीजों का जीवनकाल वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में नहीं, बलà¥à¤•ि महीनों में होता है।
( घ ) पीढ़ी पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ के आधार पर बीजों का वरà¥à¤—ीकरण ( generation system )
अंतरà¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ शसà¥à¤¯ उनà¥à¤¨à¤¯à¤¨ संघ ( international crop improvement association ) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सनॠ1946 में चारा वाली फसलों के लिठशà¥à¤¦à¥à¤§ बीज के चार वरà¥à¤— निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ किठगà¤, जो बाद में ( 1968 ) दाने वाली फसलों के लिठà¤à¥€ लागू हà¥à¤à¥¤ वासà¥à¤¤à¤µ में ये बीज के वरà¥à¤§à¤¨ ( multiplication ) की विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अवसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚ हैं, जिनमें उतà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° पीढ़ी में बीज की à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ अनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिक शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ में कमी आती जाती है -
( i ) पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤• बीज ( breeder seed ) - यह वह बीज होते हैं, जिनके उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ का नियंतà¥à¤°à¤£ संबंधित पादप पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤•ों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पादप पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ से संबंधित कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के अंतरà¥à¤—त किया जाता है। पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤• बीज की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ की देखरेख पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤• बीज नियंतà¥à¤°à¤£ दल दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ की जाती है, जो à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ पतà¥à¤° पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है कि इस बीज की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ की जांच उसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ की गई है और संतोषजनक है।
अतः यह बीज शà¥à¤¦à¥à¤§ होता है। यही बीज आधार बीज के वरà¥à¤§à¤¨ का सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। इस बीज को उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ करने वाली संसà¥à¤¥à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤¨à¤¹à¤°à¥€ पीला पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤ªà¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया जाता है। कई बार पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤• बीज बहà¥à¤¤ ही कम मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होते हैं, तो इससे वरà¥à¤§à¤¨ करके पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤• बीज तैयार किया जाता है। तो इसे नाà¤à¤¿à¤•ीय बीज ( nucleus seed ) कहा जाता है अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ यह पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤• बीज का ही à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार होता है।
( ii ) आधार बीज ( foundation seed ) - पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤• बीज की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ाने के लिठजो बीज किसी अधिकृत बीज पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥€à¤•रण संसà¥à¤¥à¤¾ की देखरेख में, राजकीय कृषि फारà¥à¤®à¥‹à¤‚, अनà¥à¤¸à¤‚धान केंदà¥à¤°à¥‹à¤‚ व सà¥à¤¯à¥‹à¤—à¥à¤¯ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤•ों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ तैयार किया जाता है, आधार बीज कहलाता है।
कà¤à¥€-कà¤à¥€ यह आधार बीज को ही बढ़ाने के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ होता है। यह पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤• बीज जितना शà¥à¤¦à¥à¤§ नहीं होता है, इस वरà¥à¤— के बीज को पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥€à¤•रण संसà¥à¤¥à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सफेद रंग का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ पतà¥à¤° पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया जाता है।
( iii ) पंजीकृत बीज ( registered seed ) - इस बीज का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ आधार बीज अथवा पंजीकृत बीज से ही, किसी बीज पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥€à¤•रण संसà¥à¤¥à¤¾ की देखरेख में किया जाता है, जिससे बीज की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ संतोषजनक बनी रहती है।
कà¥à¤› संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कà¥à¤› फसलों के लिठइसका पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ बीज उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के लिठकिया जाता है। अधिकतर आधार बीज ही पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ बीज उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ होते हैं। अतः वहां बीज का यह वरà¥à¤— नहीं पाया जाता है। हमारे देश में बीज का यह वरà¥à¤— पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¨ में नहीं है।
( iv ) पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ बीज ( certified seed ) - यह बीज आधार बीज, पंजीकृत बीज अथवा सà¥à¤µà¤¯à¤‚ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ बीज की संतति होता है। इसका उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ बीज पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥€à¤•रण संसà¥à¤¥à¤¾ की देखरेख में राजकीय कृषि फारà¥à¤®à¥‹à¤‚ अथवा वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤•ों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ मानकों के अनà¥à¤°à¥‚प किया जाता है, जिससे अनà¥à¤µà¤‚शिक शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ व गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ बनी रहे।
इस वरà¥à¤— के बीज को नीले रंग का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤ªà¤¤à¥à¤° दिया जाता है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ बीज का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ किसानों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ( किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥€à¤•रण संसà¥à¤¥à¤¾ की देखरेख के बिना ) निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ मापदणà¥à¤¡à¥‹à¤‚ को अपनाते हà¥à¤ किया जाता है, तो इसे पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥€à¤•रण संसà¥à¤¥à¤¾ का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤ªà¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं हो पाता, तो यह बीज " सतà¥à¤¯ अंकित बीज ( truthfully labelled seed ) " कहलाते हैं। यह बीज पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ बीज जितने शà¥à¤¦à¥à¤§ नहीं होते हैं।
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